28 अप्रैल 2019

पैरालिसिस और मैं

आज पूरा एक महीना हो गया जब मुझे पैरालिसिस का दूसरा अटैक हुआ था। एक हफ़्ते तक तो मैंने किसी को बताया ही नहीं। मुझे लग रहा था कि मैं ऐसे ही ठीक हो जाऊंगा। एक हफ़्ते बाद मेरी बहिन का फ़ोन आया तो मैंने बताया। डॉक्टर ने कहा कि अब तो कुछ नहीं हो सकता, उसी समय बताते तो ठीक हो जाता। अभी मैं दवा दे रहा हूं जिससे ये और ज़्यादा नहीं होगा, जितना है उतने तक ही रहेगा, बाक़ी भगवान की मज़ी। आपको मालूम है कि भगवान को तो मैं मानता नहीं। तो चारा यह बचा कि या तो घिसटने-मरने के लिए तैयार हो जाओ या अपने ऊपर विश्वास करो। इस दौरान मैं एक हाथ से शायरी वगैरहा लिख-लिख कर फ़ेसबुक, ट्विटर एवं पिंटरेस्ट पर लगाता पर लगाता रहा।
अब मैं 90 प्रतिशत ठीक हो चुका हूं। पहला अटैक तक़रीबन डेढ़-दो साल पहले हुआ था। उसपर भी लिखूंगा।
अभी इतना ही।

15 जन॰ 2019

....तो मैंने कहा था मुझे पैदा करो.....

....तो मैंने कहा था मुझे पैदा करो.....

आखि़र एक दिन तंग आकर मैंने पापाजी से कह ही दिया...

उस वक़्त मुझे भी लगा कि मैंने कोई बहुत ही ख़राब बात कह दी है....

कोई बहुत ही ग़लत बात....

लेकिन यह तो मुझे ही मालूम है कि वो रोज़ाना मुझसे किस तरह की बातें कहते थे, कैसे ताने देते थे, क्या-क्या इल्ज़ाम लगाते थे....

मैं क्या करता....

पूरी ईमानदारी से कहूं तो मैंने जबसे होश संभाला, मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही बात महसूस करता था...
कि इस दुनिया में पैदा होकर मैं एक अजीब-से जंजाल में फंस गया हूं....

.......और इससे बड़ा सच क्या होगा कि मैं अपनी मर्ज़ी से पैदा नहीं हुआ था....

कोई बच्चा अपनी मर्ज़ी से पैदा नहीं होता...

फिर इस तरह की बातें कि अहसान मानो कि मां-बाप ने तुम्हे पैदा किया...

कि इतनी सुंदर दुनिया तुम्हे देखने को मिली...

कि ज़िंदगी तुम्हारे ऊपर मां-बाप का कर्ज़ है....

ये क्या बकवास है ?

पहले बच्चे से पूछ तो लो कि दुनिया उसे कितनी सुंदर लगती है ?

मैं मानता हूं कि मां-बाप को बच्चे का अहसान मानना चाहिए कि उसे तुम उसकी मर्ज़ी के बिना इस दुनिया में लाए फिर भी उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया......

तुमने जो भी धर्म, मज़हब, अमीरी, ग़रीबी, घर, मकान, हालात...उसको दिए, उसने स्वीकार कर लिए....
ये तुम्हारा नहीं, बच्चे का कर्ज़ है तुम पर....

आज मैं महसूस करता हूं कि मैंने सौ फ़ीसदी सही बात कही पापाजी से....

वो भले आदमी थे.......मेहनती आदमी थे.....जितना उनके बस का था, ईमानदार भी थे....मुझे दुख हुआ कि मैंने उनसे ऐसा कहा....

पर कभी तो कोई कहेगा......सभी झूठ बोलते रहेंगे तो सच की हालत तो ख़राब ही रहेगी.....

वो बहुत दुखी हुए.....उन्हें काफ़ी ग़ुस्सा आ गया....उन्होंने मुझसे कहा-

‘अच्छा होता जो पैदा होते ही तुझे मार देता......’

लगता है कि उन्हें भी ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी, कोई अप्रत्याशित बात सुन ली थी उन्होंने...उन्हें शायद गहरी चोट पहुंची थी......वरना ऐसी प्रतिक्रिया न करते.......

ये दुनियादार लोग, ये सफ़ल लोग, तथाकथित सामाजिक लोग, बिज़ी लोग......लगता है कि ज़िंदगी की कई सच्चाईयां कभी इनके ज़हन में आई ही नहीं.....इन्हें छूकर भी नहीं गुज़री.....

आज भी मैं देखता हूं...टीवी पर, फ़िल्मों में, डिबेट्स् में.....

क्या कहूं कि कैसा लगता है.....

लेकिन मैं हर हाल में सच बोलूंगा.... 

15-01-2019

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